जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर ऊर्जा से चलता है, और ऊर्जा हमें भोजन से मिलती है. हमारे शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए हमारे भोजन में सभी पौष्टिक तत्वों का होना बहुत ज़रूरी होता है. किसी भी पौष्टिक तत्त्व कि कमी होने पर हमारा शरीर ठीक से काम नहीं करता और हम धीरे-धीरे बीमार पड़ने लगते हैं. अब अगर खिलाड़ियों की बात की जाए तो उनके भोजन में इन पौष्टिक तत्वों की महत्ता और भी बढ़ जाती है. इन तत्वों की कमी से न केवल उनके प्रदर्शन पर फर्क पड़ता बल्कि उनमें इंजरीज होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं. दुर्भाग्यवश पिछले कुछ सालों में कृषि का व्यावसायिकीकरण और औद्योगीकरण हो जाने के कारण भोजन की गुणवत्ता में बहुत गिरावट आयी है. इसके अलावा आधुनिक जीवन शैली, स्ट्रेस, रेफ्रिजरेटर और माइक्रोवेव का प्रयोग, अत्यधिक मात्रा में प्रिज़र्वटिव्स, एडिटिव्स. जंक फ़ूड, तम्बाकू, सिगरेट और शराब के सेवन से भी हमारे भोजन की गुणवत्ता पर बहुत बुरा असर पड़ा है. भोजन में होने वाली इन कमियों को दूर करने के लिए विज्ञान की मदद से ख़ास तरह के ‘फ़ूड सप्लीमेंट्स’ का निर्माण किया जाता है जिससे साधारण लोगों व खिलाड़ियों में होने वाली पौष्टिक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके. इन सप्लीमेंट्स में कुछ इस तरह के पौष्टिक तत्वों का मिश्रण भी किया जाता है जिनकी मदद से खिलाड़ी बिना किसी नुक्सान के खेलों में अपना प्रदर्शन बेहतर कर सकें. इस तरह के कुछ सप्लीमेंट्स खिलाड़ियों की मांस पेशियों को मजबूत बनाने में, कुछ उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा देने में, कुछ उनके बेहतर मानसिक प्रदर्शन में, कुछ खेलों के दौरान लगने वाली चोटों के असर को कम करने में और कुछ उन्हें चोटों से जल्दी उबरने में मदद करते हैं. यही कारण हैं कि विश्व का हर खिलाड़ी इन फ़ूड सप्लीमेंट्स का प्रयोग करता है.

हालाँकि फ़ूड सप्लीमेंट्स बनाने वाली कम्पनियों पर कोई ख़ास रोक न होने के कारण ये व्यापार बहुत फल-फूल रहा है. कई बड़ी कम्पनियाँ बड़े-बड़े दावे कर और अपने विज्ञापनों में मश्हूर हस्तियों का उपयोग कर अपने उत्पादों को बेचती हैं. हमें इससे बचना चाहिए. अक्सर ऐसे सप्लीमेंट्स आपकी सेहत को विशेष नुक्सान तो नहीं करते लेकिन इनसे आपके स्वास्थ और खेलों में प्रदर्शन पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता. जबकि ऐसे सप्लीमेंट्स के लिए आपसे मोटी रकम वसूली जाती है. खिलाड़ियों को बड़ी सूझबूझ के साथ इन सप्लीमेंट्स का अपनी ज़रूरत के अनुसार उपयोग करना चाहिए. उन्हें इनका सेवन करने से पहले इनकी प्रामाणिकता की पूरी तरह से जांच कर लेनी चाहिए. क्योंकि आजकल तमाम खाद्य उत्पादों की तरह ‘फ़ूड सप्लीमेंट्स’ में भी मिलावट की जा रही है. सस्ते व घटिया सप्लीमेंट्स में प्रदर्शन बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवाओं का मिश्रण किया जाता है. ये दवाएं सस्ती और बहुत आसानी से बाज़ार में उपलब्ध होती हैं. ऐसे सप्लीमेंट्स के सेवन से न केवल खिलाड़ी की सेहत पर बुरा असर पड़ता है बल्कि उसके अनजाने में डोप टेस्ट में फेल होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं. मुझे ऐसा लगता कि सरकार को फ़ूड सप्लीमेंट्स पर रोक लगाने कि बजाय फ़ूड सप्लीमेंट इंडस्ट्री पर सख्त कानून बनाकर इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए. ऐसा करने पर आम जनता और खिलाड़ियों को अच्छी गुणवत्ता वाले प्रामाणिक फ़ूड सप्लीमेंट्स मिल सकेंगे. ऐसे फ़ूड सप्लीमेंट्स के सेवन से उनके भोजन में पौष्टिक तत्वों की पूर्ती होगी और खिलाड़ियों को बिना डोप टेस्ट में फेल हुए खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी.

डॉ सरनजीत सिंह
फिटनेस & स्पोर्ट्स मेडिसिन स्पेशलिस्ट
लखनऊ


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